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दिनांक : 16th Nov'12

 

साफ्टवेयर के क्षेत्र में एक नया संस्थान क्रिस्टल आई.टी.पार्क इंदौर

 

इंदौर मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी के रूप में जाना जाता है, लेकिन आज 27 अक्टूबर, शनिवार से इसकी पहचान देश के साफ्टवेयर टेक्नालॉजी हब के रूप में भी हो जाएगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर में नवनिर्मित क्रिस्टल आई.टी.पार्क (एस.ई.जेड) का लोकार्पण करेंगे। समारोह की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय करेंगे। समारोह में प्रभारी मंत्री श्री गोपाल भार्गव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री महेन्द्र हार्डिया, सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन, इंदौर के महापौर श्री कृष्णमुरारी मोघे, शामिल होंगी।

 

उल्लेखनीय है कि भारत में इंदौर ही एकमात्र ऐसा शहर है जहाँ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आई.आई.एम.) एवं इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (आई.आई.टी.) जैसी शिक्षा जगत की दोनों प्रतिष्ठित संस्थाएँ कार्यरत हैं। आने वाले समय में आई.टी. क्षेत्र की देश की शीर्षस्थ टाटा कंसल्टिंग सर्विसेस (टी.सी.एस.) एवं इंफोसिस इंदौर में कार्य प्रारंभ कर देंगी।

 

मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेश में साफ्टवेयर इकाइयों को आकर्षित करने के लिए इंदौर में एक साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना का निर्णय लेकर क्रिस्टल आई.टी. पार्क को स्थापित एवं विकसित करने का दायित्व मध्यप्रदेश औद्योगिक केन्द्रीय विकास निगम इंदौर को सौंपा। निगम ने तेजी से कार्य किया। पार्क के लिए इंदौर के मध्य में सभी दृष्टि से उपयुक्त स्थल का चयन किया गया। यह स्थल इंदौर-खण्डवा मार्ग पर रिंग रोड पर चयनित कर लगभग 20 एकड भूमि पर क्रिस्टल आई.टी.पार्क के निर्माण के लिए उपलब्ध करवा कर कार्य प्रारंभ किया गया। पार्क का निर्माण लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है, जिसमें साफ्टवेयर ईकाइयों के लिए समस्त आधुनिक सुविधायुक्त भवनों का निर्माण किया गया है। क्रिस्टल आई.टी. पार्क के पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाने पर पाँच हजार से अधिक नागरिकों को इस क्षेत्र में सीधे रोजगार सुलभ हो सकेगा।

 

पार्क की स्थापना दो चरणों में की जा रही है। प्रथम चरण में लगभग 12 एकड़ भूमि में 52 हजार वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल का निर्माण दो बहुमंजिला भवनों के रूप में किया गया है। भवन की डिजाइन आँख के आकार की है तथा कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 31 हजार 800 वर्ग मीटर है। द्वितीय चरण में क्रिस्टल आई.टी.पार्क इंदौर का द्वितीय भवन चार मंजिला बनाया गया है, जिसका निर्माण 18 हजार 200 वर्ग मीटर में है। पार्क के दोनों भवन के मध्य में एक युटीलिटी भवन का भी निर्माण किया गया है, जहाँ से सम्पूर्ण क्षेत्र में बिजली तथा वातानुकूलन की व्यवस्था का नियंत्रण किया जायेगा । इसके अतिरिक्त सम्पूर्ण क्षेत्र में अत्यंत ही सुन्दर लेंडस्केपिंग की गयी है, भवन में पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था की गयी है। दोनों भवन में आसानी से लगभग एक हजार वाहनों की पार्किंग की सुविधा रहेगी।

 

भारत सरकार ने इस क्षेत्र को साफ्टवेयर के लिए उत्पाद विशेष-विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र घोषित किया है। यह इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश का पहला क्रियाशील विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र है। वर्तमान में इस प्रक्षेत्र के द्वितीय भवन में तीन ईकाइयों द्वारा लगभग 285 लाख रुपये का निवेश कर कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। ये तीन ईकाई क्रमशः मेसर्स इम्पीटस इन्फोटेक इंडिया प्रायवेट लिमिटेड, मेसर्स क्लीयरट्रेल टेक्नालॉजी प्रायवेट लिमिटेड एवं मेसर्स इन्टेलिकस टेक्नालॉजी प्रायवेट लिमिटेड हैं।

 

प्रदेश अब पहचान का मोहताज नहीं - मंत्री श्री विजयवर्गीय (ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2012)

 

 

प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने मजबूत अर्थ-व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा दिया है। प्रदेश जब पहचान का मोहताज नहीं है। एक ओर जहाँ विश्व और देश में भी मंदी का दौर है, वहीं मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होना प्रदेश के लिये गौरव की बात है।उन्होंने कहा कि आई.टी.क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। श्री विजयवर्गीय तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तीसरे दिन आई टी और आई टी ई एस विषयक सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबंधित 2987 करोड़ रुपये के 46 एम.ओ.यू. का आदान-प्रदान किया गया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार श्री प्रसन्न दाश उपस्थित थे। इन उद्योगों की स्थापना से प्रदेश में लगभग 2 लाख 80 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध होगा।

 

सेमीनार में एम.पी.एस.ई.डी.सी. के चेयरमेन श्री प्रेमशंकर वर्मा ने प्रदेश में आई.टी. क्षेत्र के लिये अपार संभावनाएँ व अनुकूल परिस्थितियाँ बताते हुए निवेशकों से निवेश का आव्हान किया। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री हरिरंजन राव ने कहा कि प्रदेश में सूचना प्रोद्योगिकी के लिये उपयुक्त वातावरण है। उन्होंने आई.टी. क्षेत्र के लिये भूमि की उपलब्धता, टेलीकॉम और इंटरनेट का व्यापक नेटवर्क, 24 घण्टे बिजली आपूर्ति के अलावा इंदौर में क्रिस्टल आई.टी. पार्क और साफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क के अलावा ग्वालियर,भोपाल तथा जबलपुर में जरूरी इनपुट संसाधनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में दूसरे शहरों की अपेक्षा ऑपरेटिंग कॉस्ट 30 प्रतिशत कम अनुमानित की गयी है। इसका लाभ आई.टी. क्षेत्र के उद्यमियों को उठाना चाहिये। उन्होंने इस क्षेत्र के लिये वित्तीय और गैरवित्तीय सुविधाओं और प्रावधानों से भी अवगत करवाया।

 

सेमीनार में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में कार्य करने के अपने अनुभव सुनाये। एम.एस.ई.डी.सी. के संचालक डॉ.पी.के.चाण्डे, नेसकॉम के उपाध्यक्ष श्री राजीव वैष्णव, इंफोसिस लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री आर.डी.कामथ, एपटेक के श्री शौर्य चक्रवर्ती, इंफोविंस के श्री सिद्धार्थ सेठी, जेनसार टेक्नालॉजी के डॉ.गणेश नटराजन तथा नेटलिंक के श्री अनुराग श्रीवास्तव ने भाग लिया। नेसकॉम के उपाध्यक्ष श्री राजीव वैष्णव ने इंदौर को आई.टी. क्षेत्र में चैलेंजिंग सिटी तथा भोपाल,ग्वालियर, जबलपुर को फॉलोअर सिटी के रूप में रेखांकित किया। नेटलिंक के वाइस चेयरमेन श्री अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि वे भोपाल में आई.टी.सेक्टर के क्षेत्र में निवेश कर बहुत खुश हैं। एम.पी.एस.ई.डी.सी. के संचालक डॉ.पी.के.चांदे ने इंदौर शहर को आई.टी. के लिये उपयुक्त बताते हुए कहा कि यहाँ आई.टी.क्षेत्र से जुड़े 16 संस्थान हैं। इससे आई.टी.सेक्टर को पर्याप्त मानवीय संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं। संचालन श्री राजीव वैष्णव ने किया तथा आभार श्री एल.के.दीक्षित ने माना।

 

ई-भुगतान में श्रेष्ठ कार्य के लिये मध्यप्रदेश को गोल्ड अवार्ड

 

 

ई-भुगतान के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य के लिए मध्यप्रदेश को गोल्ड अवार्ड से नवाजा गया है। यह अवार्ड वर्ष-2012 के लिये गत दिवस स्कॉच डेव्हलपमेंट फाउण्डेशन के कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री श्री सलमान खुर्शीद ने मध्यप्रदेश के आयुक्त, लेखा श्री टी. धर्माराव को दिया। ई-भुगतान प्रणाली के साथ अन्य आई.टी. परियोजनाओं को सम्मिलित करते हुए मध्यप्रदेश को ‘‘स्टेट ऑफ दि ईयर अवार्ड'' भी दिया गया। यह अवार्ड सभी राज्यों/संस्थाओं द्वारा आई.टी. सेक्टर में किये गये श्रेष्ठ कार्यों के लिये हर साल दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में अब लगभग 87 प्रतिशत ई-भुगतान किया जा रहा है। लगभग पाँच लाख कर्मचारी, पाँच लाख वेण्डर और पेंशनरों को ई-भुगतान किया जा रहा है। वेण्डरों को ई-भुगतान करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है।