वर्चुअल क्लासरूम

 

परिचय

 

मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के सभी 313 विकासखण्डों में एक शासकीय एवं 100 महाविद्यालय एवं वीडियो क्रॉफ्रेसिंक सुविधा उपलब्ध कराते हुए विद्यार्थियों के लिए चरणबद्ध क्रम से विभिन्न विषयों पर यथा गणित, अंग्रेजी एवं विज्ञान के लिए वर्चुअल कक्षाओं के संचालन का निर्णय लिया गया है। यह स्कूल शिक्षा विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त परियोजना है जो सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा एन.आई.सी. के तकनीकी सहयोग से संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल मे एक Teaching-End की स्थापना की जाएगी। प्रदेश के सभी 313 विकासखण्डों में Teaching-End स्थापित किया जाएगा। शिक्षण द्विपक्षीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगा। सभी चयनित विद्यालयों, महाविद्यालयों के विद्यर्थी एक साथ भोपाल से किये जा रहे शिक्षण को देख व सुन सकेगें। शिक्षाक तथा विद्यार्थियों के बीच वीडियो के माध्ययम से संवाद भी कर सकेंगे।

 

कार्यक्रम के उद्देश्य

 

  • विद्यालयीन शिक्षण में गुणवत्ता लाना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर-शिक्षा के माध्यम से दूर करना।
  • उत्कृष्ट शिक्षकों का लाभ सभी को उपलब्ध कराना।
  • तकनीकी के लाभ को सभी को उपलब्ध कराना।
  • कठिन विषयांशों को तकनीकी के माध्यम से सरल करना।
  • ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष शिक्षण उपलब्ध करा कर, उन्हें चयनित होने में सहायता करना।

 

हितग्राही

 

प्रदेश के 313 विकासखण्ड मुख्यालयों में चिन्हित उत्कृष्ट या आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 से 12 तक के चयनित विद्यार्थी तथा शिक्षक।

 

कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण

 

इस कार्यक्रम में भोपाल में एक टिचिंग एण्ड की स्थापना की जाएगी। प्रदेश के सभी 313 विकासखण्ड मुख्यालयों में स्थित एक उत्कृष्ट या आदर्श विद्यालय में लर्निंग एण्ड स्थापित होंगे। शिक्षण द्वी-पक्षीय विडियो से होगा। सभी 313 विद्यालयों के विद्यार्थी एक साथ, भोपाल से किए जा रहे शिक्षण को देख व सुन सकेंगे। विद्यार्थी शिक्षकों से प्रश्न भी कर सकेंगे। सामान्यतः एक बार में लगभग 8 से 12 कक्षाओं के विद्यार्थियों को शिक्षक देख भी सकेगा तथा किसी एक कक्षा के विद्यार्थियों के साथ विडियों के माध्यम से संवाद कर सकेगा।

 

कार्यक्रम में प्रदेश में सूचना प्रौध्योगिकी विभाग द्वारा सभी विकासखण्ड मुख्यालयों में उपलब्ध कराए गए "स्वान" नेटवर्क का उपयोग होगा। प्रत्येक चयनित विद्यालय अपने भवन में एक कक्ष को लर्निग एण्ड के रूप में विकसित करेगा। इस कक्ष में आवश्यक उपकण यथा कम्प्युटर, टी.वी./प्रोजेक्टर, केमेरा इत्यादी उपलब्ध होगा।

 

प्रत्येक ऐसे कक्ष में लगभग 40 विद्यार्थी बैठ सकेंगे। कार्यक्रम में तात्कालिक प्रश्नों के समाधान के लिए विषय शिक्षक भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की सफलता के अनुसार इस कार्यक्रम के उपयोग को भविष्य में बढाया जा सकेगा।